हाईकोर्ट ने सभी 13 जिलों में वृद्धाश्रम खोलने के दिए निर्देश

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हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से प्रदेश के सभी 13 जिलों में वृद्धाश्रम खोलने के निर्देश दिए हैं। साफ किया है कि वृद्धाश्रमों में आधुनिक सुविधाओं के साथ ही मेडिकल सुविधाएं भी होनी चाहिए। हल्द्वानी के सीनियर सिटीजन वेलफेयर सोसाइटी ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि राज्य के चंपावत व चमोली में एक-एक सरकारी वृद्धाश्रम मौजूद है, जबकि हरिद्वार, देहरादून में वृद्धाश्रम गैर सरकारी संस्थाओं की ओर से संचालित किए जा रहे हैं। अन्य जिलों में वृद्धाश्रम नहीं हैं।

वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने सभी जिलों में तीन माह के भीतर वृद्धाश्रम खोलने के आदेश पारित करते हुए यह भी कहा है कि इनमें आधुनिक व मेडिकल सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए।

आर्मस ट्रिब्यूनल की चार माह में स्थायी बेंच बनाएं

हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार माह के भीतर प्रदेश में आर्मस फोर्स ट्रिब्यूनल की स्थायी बेंच स्थापित करने के आदेश पारित किए हैं। अधिवक्ता व रिटायर लेफ्टिनेंट कर्नल ललित कुमार ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि राज्य में बड़ी तादाद में सेवारत, सेवानिवृत्त सैनिक, उनके परिवार के सदस्य, वीरांगनाएं रहती हैं। जिन्हें पेंशन व अन्य शिकायतों की सुनवाई के लिए लखनऊ की दौड़ लगानी पड़ती है या शिकायत से ही वंचित रहना पड़ता है।

यह भी बताया गया कि साल में दो बार ट्रिब्यूनल की सर्किट बेंच नैनीताल आती है, जिसमें पूर्व सैनिकों व उनके परिवारों को बेंच के बारे में उचित जानकारी नहीं मिल पाती। जिससे उनकी समस्याओं का निराकरण संभव नहीं हो पाता।

वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद केंद्र सरकार को चार माह के भीतर आर्मड फोर्स ट्रिब्यूनल की स्थायी बेंच गठित करने के आदेश पारित किए हैं। हाई कोर्ट ने अधिवक्ता क्लर्क के हित में केंद्र सरकार व सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार दो माह के भीतर विधेयक लाने पर विचार करने का आदेश सरकार को दिया है।

हाई कोर्ट क्लर्क एसोसिएशन ने जनहित याचिका दायर कर कहा कि 2003 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अधिवक्ता क्लर्कों के हित में विधेयक बनाने के निर्देश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट के इन दिशा-निर्देशों को केंद्र सरकार द्वारा सभी राज्य सरकार को विधेयक लाने पर विचार करने का आग्रह किया था। जिसके बाद केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, उड़ीसा आदि राज्यों द्वारा अधिवक्ता क्लर्क हित में विधेयक लाया गया।

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