750 करोड़ रुपये के घोटाले में घिरी केजरीवाल सरकार

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प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष अजय माकन ने कहा है कि आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा 1000 इलेक्टिक बसें खरीदने के प्रस्ताव में ही घोटाले की बू आ रही है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में दिल्ली सरकार ने ऐसी एक बस की कीमत 2.5 करोड़ बताई है, जबकि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने इसे 1.75 करोड़ रुपये में खरीदी है। उन्होंने कहा कि यह साफ तौर पर 750 करोड़ का घोटाला है।

विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित पत्रकार वार्ता में माकन ने आप सरकार को पर्यावरण संरक्षण के मोर्चे पर भी असफल करार दिया। उन्होंने कहा कि कहने को सरकार ने इस वर्ष ग्रीन बजट पेश किया, लेकिन उसके तहत अभी तक कोई ठोस कदम नही उठाया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने 2009 में एक कानून के माध्यम से दिल्ली में प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा दिया था और बाद में इसे सभी प्लास्टिक पैकेजिंग और एकल उपयोग डिस्पोजल प्लास्टिक में वितरित किया था, लेकिन यह प्रतिबंध शायद ही कभी लागू किया गया हो।

अजय माकन ने कहा कि दिल्ली सरकार ने दिल्ली-मेरठ हाई स्पीड रेल कॉरिडोर परियोजना के लिए भी अभी तक न तो स्वीकृति दी है और न ही बजट जारी किया है। इसी तरह दिल्ली में कहने को 971 प्रदूषण जांच केंद्र हैं, लेकिन परिवहन विभाग में केवल 28 निरीक्षक हैं और उनमें से केवल एक इंस्पेक्टर इतने सारे स्टेशनों के वास्तविक आधार पर निरीक्षण के लिए उपलब्ध हैं। ऐसे भ्रष्टाचार मुक्त प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र जारी हो ही नहीं सकते।

पैरामेडिकल सेंटर के प्रोजेक्ट खारिज करने की निंदा

प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन ने यह भी कहा कि कांग्रेस की यूपीए सरकार ने फरवरी 2014 को नजफगढ़ में 100 बिस्तरों के अस्पताल और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस का शिलान्यास किया था। लेकिन, चार साल बीतने के बाद भी अस्पताल का प्रोजेक्ट पूरा नही हुआ है, जबकि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस का प्रोजेक्ट तो भाजपा की केंद्र सरकार ने खत्म ही कर दिया है।

उन्होंने कहा कि यह नजफगढ़ क्षेत्र की जनता के साथ विश्वासघात है, क्योंकि इसके बनने से हजारों लोगों को रोजगार मिलता, सैकड़ों गरीब विद्यार्थियों को दाखिले मिलते। पूर्व सांसद महाबल मिश्र ने कहा कि इस इंस्टीटयूट के लिए यूपीए सरकार द्वारा एचएलएल (हिंदुस्तान लेटेक्स लिमिटेड) लाइफकेयर लिमिटेड को 86 करोड़ भी अदा किए गए थे। इसमें से छह करोड़ रुपये उस समय इसकी डीपीआर बनाने में खर्च कर दिए गए थे। एचएलएल के पास 80 करोड़ रुपये शिलान्यास के समय से बचे हुए है, जबकि अस्पताल और मेडिकल इंस्टीट्यूट की लागत 245 करोड़ निश्चित की गई थी।

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