सीएम ने थपथपाई किसानों की पीठ

किसान महोत्सव पर मंच से कृषक सम्राट प्रेम चंद्र शर्मा और सुरेश कुमार उर्फ पप्पू भाई की सराहना की कहा, हर खेत आबाद हो इसके लिए सरकार है किसानों के साथ

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सुरेश कुमार (बाएं), प्रेम चंद्र शर्मा (दाएं)
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देहरादून। वीर माधो सिंह कृषि भवन में मंगलवार को आयोजित राज्य स्तरीय कृषक महोत्सव रबी-2017 के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने महोत्सव में आए दो किसानों को मंच से शाबासी दी। सीएम ने कहा कि उनके पास बंदरों, सुअरों के फसलों को फलों को उजाडने की शिकायतें आते रहती हैं। उन्होंने कहा कि ये भी किसान हैं जिनका साबका बंदरों, सुअरों और तमाम जंगली जानवरों से पडता है लेकिन ये तमाम मुश्किलों को हराकर कृषि-बागवानी के क्षेत्र में चकम रहे हैं।
सीएम ने जिन किसानों की तारीफ के पुल मंच से बांधे उनके बारे में आपको बताते हैं। ग्राम और पोस्ट आफिस हटाल, तहसील त्यूनी जनपद देहरादून निवासी कृषक सम्राट प्रेम चंद्र शर्मा ने जब से होश संभाला खेत उनकी पाठशाला और दोस्त भी। महज पांचवीं तक पढे शर्मा को भारत सरकार के कृषि मंत्री ने कृषक सम्राट की उपाधि से यूं ही सम्मानित नहीं किया। शर्मा की देखरेख में करीब 1600 पेड अनार के फल दे रहे हैं। पिछले साल करीब 12 लाख का टर्नओवर अनार से प्राप्त कर चुके हैं। आडू का 250 पौधों का बागीचा भी तैयार हो गया है। बताते हैं अगले साल इन पौधों से फल लेंगे। शर्मा ने बताया कि उनकी ओर से तैयार पौंधे महज दो साल में ही फल देने लगते हैं। अटाल और सैंज गांव में टमाटर बोया गया था जिससे करीब चार करोड की आय हुई। देहरादून मंडी में खपत कम होने के कारण टमाटर दिल्ली मंडी ले जाते हैं। जबकि गोभी दून मंडी में सप्लाई करते हैं।
अब बात करते हैं दूसरे किसान जिनकी पीठ सीएम ने मंच में बुलाकर ठोंकी। नाम है सुरेश कुमार उर्फ पप्पू भाई। मूलरूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकसभा सीट बनारस के रहने वाले हैं। खेती-किसानी के काम को करते-करते उत्तराखंड पहुंच गए। देहरादून में जीएमएस रोड स्थित इंजीनियरिंग इन्क्लेव में रहते हैं। खेती-किसानी को बढावा देने के लिए किसानों के बीच जाकर उन्हें तकनीक और आर्थिक मदद देते हैं। किसान पप्पू भाई ने सीमांत जनपद पिथौरागढ के मदकोट, चमोली के घेश के अलावा ंिपंडरघाटी के करीब 22 गांवों में मटर की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया। पिछले साली करीब साढे सात लाख रूपये महज मटर से आय अर्जित की। आपको बता दें घेश वह गांव हैं यहां के बाद हमारा देश नहीं है।

 

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